Mentor Manan Shukla is an epitome of Vedik Knowledge and Anushtahan as he indulged himself in this field since he was mere 14 years old teenage boy. Although he has completed his graduation in Computer Applications from Saurashtra University and started his career in the same field, his soul and heart always pulled him back to nurture the profession that his ancestors has mastered and always took pride for that. He happily embraced the work that his grandfather and afterwards his uncle used to do, that is doing Vedik Yagna, Different Religious Procedures holistically called –Solah Sanskara – literary means 16 ceremonial rituals that usually every Indian family has to observe since birth to death. Some of them includes Vastu, GrahShanti, ShatKarma, Shanti Karma, Lagna Vidhi, Yagnopavit, UttarKriya and so on.

Manan is born in the direct lineage –Kul Parampara – of Shukla Yajurveda Shakha and attained his Yagnopavit ritual at the tender age of 12 years only. He was well trained by his grandfather and his uncle Shri Dushyant Shuklaji who himself is very well versed in Bhaagvat Katha, Puran, Jyotish and other Vedik Karma.

Manan wanted to understand the core essence of Indian Philosophy and Veda, Upnishada like Indian sacred scriptures so he officially took admission in one of the famous Indian Gurukul- Sola Bhagvat Vidyapeeth, Ahmedabad and learned all the sacred rituals in most authentic ways.

Today there are many pandits who acted professionally but became people pleasure at the end just to please their host. They used to modify many sacred norms suggested in the scriptures, but Manan never bent his rules and always showed his adamancy. His most authentic ways to conduct the rituals as it have been prescribed in the Shastra and Purana, gained him much popularity in a way that his fame extended internationally and he got calls from USA and from many renowned countries to accomplish some of the rituals.

The ShriTvam Mentors Team warmly welcomes Mr. Manan Shukla and looking forward for long lasting relationship.

श्री मनन शुक्ला वैदिक ज्ञान और अनुष्ठान के ज्ञाता है। एक सुप्रसिद्ध ब्राहमीन कुल मे जन्म लेकर उन्हों ने केवल 14 वर्ष की आयु से ही वैदिक ज्ञान तथा कर्म-कांड मे महारत प्राप्त करना शरू कर दिया था। आधिकारिक तौर पर श्री मनन शूकलजी ने सौराष्ट्र विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में स्नातक की पढ़ाई पूरी की है और उसी क्षेत्र में अपना करियर शुरू किया था, किन्तु विधाता ने उनके लिए एक अलग ही पथ सुनिश्चित किया था, जिस के चलते उनकी आत्मा और ह्रदय ने हमेशा उन्हें वैदिक कर्म कांड की तरफ आकर्षित किया। यह वो पथ था जिसको उनके पूर्वजों ने हमेशा अपने सुप्रयत्नों से गौरवान्वित किया था।

श्री मननजी ने भी इसी राह को सहर्ष अपनाया जो उनके दादा और बाद में उनके चाचा पूरे भक्तिभाव से निभाते आ रहे थे जैसे की वैदिक यज्ञ, विभिन्न धार्मिक प्रक्रियाएं जिन्हें समग्र रूप से सोलह संस्कार कहा जाता है एवं जो आमतौर पर हर भारतीय परिवार को जन्म से मृत्यु तक करना पड़ता है। उनमें से कुछ में वास्तु, गृहशांति, षटकर्म, शांति कर्म, लग्न विधि, यज्ञोपवीत, उत्तर क्रिया आदि शामिल हैं। श्री मनन शुक्ल को उनके दादा और बाद मे उनके चाचा श्री दुष्यंत शुक्लाजी ने अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया है, जो स्वयं भागवत कथा, पुराण, ज्योतिष और अन्य वैदिक कर्म में पारंगत हैं।

श्री मननजी भारतीय दर्शन और वेद, उपनिषद जैसे भारतीय पवित्र ग्रंथों के मूल सार को अधिक समझना चाहते थे, इसलिए उन्होंने आधिकारिक तौर पर प्रसिद्ध भारतीय गुरुकुल- सोला भागवत विद्यापीठ, अहमदाबाद में प्रवेश लिया और सभी पवित्र अनुष्ठानों को सबसे प्रामाणिक तरीकों से सीखा। आज ऐसे कई पंडित हैं जो पेशेवर रूप से काम करते हैं, तथा अपने मेजबान को खुश करने के लिए काफी हद तक विधि विधान मे समजौता कर लेते है, किन्तु श्री मननजी ने कभी भी शास्त्रों में सुझाए गए उन पवित्र मानदंडों तथा नियमों को नहीं तोड़ा और हमेशा अपनी दृढ़ता दिखाई। शास्त्रों और पुराणों में बताए गए अनुष्ठानों को करने के उनके सबसे प्रामाणिक तरीकों ने उन्हें इस तरह से लोकप्रियता दिलाई कि उनकी ख्याति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल गई और उन्हें कुछ अनुष्ठानों को पूरा करने के लिए USA एवं कई और प्रसिद्ध देशों से भी बुलावा आया। श्रीत्वम की मेन्टर टीम मे श्री मनन शुक्ला का हार्दिक स्वागत है तथा हम दीर्घकालीन सायुज्य की आशा रखते है।

श्री मनन शुक्ल निम्न विधिविधान मे वेदोक्त तथा शास्त्रोक्त मत से पारंगत है।

  • सोलह संस्कार
  • ऊपनयन
  • वास्तु तथा गृहप्रवेश
  • वाग्दान तथा लग्नविधि
  • शास्त्रोक्त नवचंडी
  • रुद्र यज्ञ (लघु रुद्र से महा तथा अति रुद्र)
  • दिवाली तथा धनत्रयोदशी पूजा।
  • सर्व प्रकार के यज्ञ तथा अनुष्ठान
  • नवग्रह विधि
  • रत्न सिद्धि
  • ज्योतिशविद्या
  • उत्तरक्रिया आदि